स्वामी दयानन्द सरस्वती

स्वामी जी के विषय में संसार क्या कहता है -

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महर्षि दयानन्द - आधुनिक ऋषियों में महान्

महर्षि दयानन्द के विषय में मेरा मंतव्य यह है कि वह हिन्दुस्तान के आधुनिक ऋषियों में, सुधारकों में से, श्रेष्ठ पुरुषों में से एक थे। उन का ब्रह्मचर्य, विचार स्वतन्त्रता, सर्व प्रति प्रेम, कार्य कुशलता आदि गुण लोगों को मुग्ध करते थे। उन के जीवन का प्रभाव हिन्दुस्तान पर बहुत ही पड़ा है। मैं जैसे जैसे प्रगति करता हूँ, वैसे-वैसे मुझे महर्षिजी का बताया मार्ग दिखाई देता है। ब्रिटिश राज्य स्थापित होने के पश्चात् जनता के साथ सीधा सम्पर्क रखने का मार्ग महर्षि दयानन्द ने खोज निकाला। इस का यश महर्षि दयानन्द एवं उन के आर्यसमाज को प्राप्त है। महर्षि दयानन्द तथा उनके आर्यसमाज ने प्रजा में नव चेतना पैदा की है। हिन्दू समाज की अनेक कुरीतियों को दूर करने का प्रयत्न किया है। राष्ट्रीय शिक्षण, स्त्री शिक्षण तथा दलितोद्धार आदि न भुलाई जा सकने जैसी राष्ट्र की महान् सेवा की हैं। मुझे आर्यसमाज बहुत ही प्रिय है। महर्षि दयानन्द के इस पवित्र देशोपकारी कार्य का कभी भी अपमान होगा तो मैं उस को महापाप समझूगा।

- मोहनदास करमचन्द गान्धी
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योगिराज स्वामी दयानन्द सरस्वती - वेद भाष्यकार

महर्षि दयानन्द सरीखे विद्वान् तथा योगिराज की ही ऐसे घोर अंधकार के युग में आवश्यकता थी, क्योंकि बीस शताब्दियों से भी अधिक समय से वेदों पर लगाए गए कलंक के टीके को धोने की शक्ति प्राप्त करने के लिए मनुष्य को बालब्रह्मचारी होना चाहिये। स्वामी दयानन्द का विशाल हृदय वेदों की दुर्दशा होती देखकर विह्वल हो उठा; ऋषि इसे सहन न कर सके। अज्ञानतिमिर की छाती छलनी करने के लिए उन्होंने बीहड़ वनों, निर्जन स्थानों, ग्रामों, नगरों, समस्त भारत की चारों दिशाओं को छानकर आदित्य की पदवी प्राप्त तथा नवीन भाष्यकारों द्वारा प्रसारित अविद्या को दूर करने के लिए उन प्राचीन ऋषियों की पद्धति पर वेदों का भाष्य आरम्भ किया।

- स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती
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आदर्श सुधारक स्वामी दयानन्द सरस्वती

आज केवल भारत ही नहीं, सारे धार्मिक सामाजिक, राजनैतिक संसार पर दयानन्द का सिक्का है। मतों के प्रचारकों ने अपने मन्तव्य बदल लिए हैं, धर्म पुस्तकों के अर्थों का संशोधन किया है, महापुरुषों की जीवनियों में परिवर्तन किया है। स्वामी जी का जीवन इन जीवनियों में बोलता है। ऋषि मरा नहीं करते, अपने भावों के रूप में जीते हैं। दलितोद्धार का प्राण कौन है? पतित पावन दयानन्द। समाज सुधार की जान कौन है? आदर्श सुधारक दयानन्द। शिक्षा के प्रचार की प्रेरणा कहां से आती है? गुरुवर दयानन्द के आचरण से। वेद का जय जयकार कौन पुकारता है? ब्रह्मार्षि दयानन्द। माता आदि देवियों के सत्कार का मार्ग कौन सिखाता है? देवी पूजक दयानन्द। गोरक्षा के विषय में प्राणिमात्र पर करूणा दिखाने का बीड़ा कौन उठाता है? करुणानिधि दयानन्द।

आओ ! हम अपने आप को ऋषि दयानन्द के रंग में रंगें। हमारा विचार ऋषि का विचार हो, हमारा आचार ऋषि का आचार हो, हमारा प्रचार ऋषि का प्रचार हो। हमारी प्रत्येक चेष्टा ऋषि की चेष्टा हो। नाड़ी नाड़ी से ध्वनि उठे – महर्षि दयानन्द की जय।

- पण्डित चमूपति एम्. ए
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युगों से बंद दरवाजों की कुंजी

वेदों का भाष्य करने के बारे में मेरा विश्वास है कि चाहे अन्तिम पूर्ण अभिप्राय कुछ भी हो, किन्तु इन बातों का श्रेय दयानन्द को ही प्राप्त होगा कि उसने ही सर्व प्रथम वेदों की व्याख्या के लिये निर्दोष मार्ग का आविष्कार किया था। चिरकालीन अव्यवस्था और अज्ञान-परस्पर के अन्धकार में से सूक्ष्म और मर्म भेदी दृष्टि से उसी ने ही सत्य को खोज निकाला था। जंगली लोगों की रचना कही जाने वाली पुस्तक के भीतर उसके धर्म पुस्तक होने का वास्तविक अनुभव उन्होंने ही किया था। ऋषि दयानन्द ने उन द्वारों की कुंजी प्राप्त की है, जो युगों से बन्द थे और उसने पटे हुए झरनों का मुख खोल दिया।

- श्री अरविन्द घोष

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